भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुरगांव पत्तन,गोवा एक खुबसूरत प्राकृतिक बंदरगाह युक्त प्राचीन पत्तन है जो सदियों से देश के आर्थिक विकास में निरंतर सेवारत है। इस पत्तन को दिनांक 2-12-1963 को महापत्तन घोषित किया गया।मुरगांव पत्तन,लौह अयस्क निर्यात करनेवाला भारत का प्रथम पत्तन साईटमैप है जो करीब 50.02 लाख मिलीयन टन वार्षिक लौह अयस्क यतायत उत्पादन करता है।
यघपि अयस्क प्रमुख नैभार है परन्तु भारतिय महापत्तनों की श्रेणी में आने के बाद हीं यहां तरल बल्क तथा सामान्य नैभार यतायत में नियमित वृध्दि हुई है। बेहतरीन सुविधाएं, उच्च उत्पादकता,कुशल प्रशासन तथा समर्पित कर्मी इस पत्तन को भारतीय उपमहाव्दीप में सबसे कार्यक्षम पत्तन बनाने में सहायक रहे हैं।
इन सभी विशेषताओं के कारण मुरगांव पत्तन,गोवा के पास व्यापार तथा उघोग की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने तथा राष्ट्र के आर्थिक विकास में योगदान देने की विशिष्ट क्षमता है। |